देवरहा बाबा का जीवन परिचय - SAFAL ADDA

Breaking

Sunday, 6 August 2017

देवरहा बाबा का जीवन परिचय

देवरहा बाबा -- एक चमत्कारिक शक्ति


इस दुनिया में बाबा तो बहुत है। लाखों बाबाओं में से एक है देवरहा बाबा। देवरहा बाबा चमत्कारी शक्तियों के भंडार थे। देवरहा बाबा ने जिस स्थान पर निवास किया, उस स्थान को आज देवरिया नाम से जाना जाता है। आइए, जानते हैं देवरहा बाबा के जीवन व शक्तियों के बारे में।




Devraha baba vrindavan


देवरहा बाबा का जन्म --


देवरहा बाबा का जन्म कब हुआ, कहां हुआ यह किसी को सही तरीके से ज्ञात नहीं है। कुछ लोगों का मानना है की देवरहा बाबा 250 साल तक जीवित रहे और कुछ लोगों का मानना है की देवरहा बाबा 900 साल तक जीवित रहे। यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है की वह कितने साल तक जीवित रहे।

देवरहा बाबा का जन्म स्थान --


देवरहा बाबा का जन्म स्थान तो किसी को मालूम नहीं है। बस इतना ही मालूम है कि देवरहा बाबा हिमालय पर्वत पर निवास करते थे। हिमालय पर्वत के बाद देवरहा बाबा जहां रहते थे उस जगह को आज देवरिया नाम से जाना जाता है।

देवरहा बाबा के चमत्कार --


देवरहा बाबा के चमत्कार तो बहुत है। मगर हम कुछ चमत्कारों के बारे में बता रहे हैं। बाबा हमेशा एक मचान पर बैठते थे। वही से लोगों को पैर से आशीर्वाद देते थे। बाबा के पास एक टोकरी हमेशा रखी रहती थी। टोकरी में से बाबा सबको प्रसाद देते थे। यह टोकरी कभी भी खाली नहीं होती थी, चाहे कितने भी लोग आ जाएं। बाबा टोकरी में हाथ डालते और सबको कुछ न कुछ प्रसाद देते थे। टोकरी का खाली न होना यह भी बाबा का चमत्कार था।

देवरहा बाबा के दर्शन --


बाबा के दर्शन हेतु प्रतिदिन हजारों लोग आते थे। देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, राजनेता, अधिकारी, साधु-संत और गांव के किसान भी बाबा के दर्शन को आते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पं. मोतीलाल नेहरू, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, पं. मदन मोहन मालवीय, पं. जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र बॉस और नेपाल के राजा बाबा के दर्शनको भारत आये और उनसे प्रेरणा ली। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. जाकिर हुसैन बाबा के अनन्य भक्त थे। इंग्लैंड के राजा जार्ज पंचम उनके दर्शन के लिए भारत आए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल बहादुर शास्त्री, चौधरी चरण सिंह, गुलजारीलाल नंदा, डॉ. शंकर दयाल शर्मा आदि नेतागण बाबा के दर्शन को आते थे।

देवरहा बाबा की महासमाधि --


देवरहा बाबा का योगिनी एकादशी के दिन वृंदावन में यमुना नदी के किनारे 19 जून, 1990 को 10:00 बजकर 28 - 32 मिनट के बीच ब्रह्मरंध्र फट गया और श्री महाराजजी के मस्तक से एक ज्योति निकलकर महाज्योति में विलीन हो गई। मंच के नीचे खड़े साधुओ ने उसी समय देखा कि बाबा की खोपड़ी के अंदर 1 मिनट तक प्रकाश रहा और अग्नि की लपट की तरह अपने आप समाप्त हो गया। इसके बाद दूसरे दिन बाबा के शरीर को जलसमाधि दे दी गई। जल समाधि के तुरंत बाद बाबा का शरीर पानी में गायब हो गया। इसके बाद लोगों में बाबा के प्रति आस्था और पक्की हो गई।

देवरहा बाबा के चमत्कार तो सभी लोग जानते हैं। बाबा के भक्त भारत में ही नहीं विदेशों में भी रहते है। बाबा के भक्त मन की शांति के लिए विदेश से वृन्दावन आश्रम आते हैं। लोगों का ऐसा विश्वास है कि बाबा आज भी अपने भक्तों के साथ हैं और देवरहा बाबा आज भी अपने भक्तों की मदद करते हैं।



No comments:

Post a Comment